गणेश जी की कहानी
गणेश जी की उत्पत्ति कैसे हुई ?
गणेश जी की उत्पत्ति के पीछे कई कहानियाँ प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती ने शिव जी के सबसे प्रिय गण नंदी को एक कार्य सौंपा था लेकिन नंदी बाबा से त्रुटि हो गयी।
इसके बाद माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल एवं उबटन से एक बालक के पुतले का निर्माण किया उस बालक रुपी पुतले में माता ने अपनी शक्ति से प्राण डालकर कहा की तुम मेरे पुत्र हो। जिनका नाम गणेश रख दिया।
उसके बाद माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को द्वार पर पहरा देने के लिए कहकर भोगवती नदी में स्नान के लिये चली गयी। उसी समय वहाँ पर भगवान शंकर पधारे और वो अंदर जाने लिए के लिए ज़िद करने लगे पर गणेश जी अपने आज्ञास्वरूप उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जिससे गुस्सा होकर शंकर जी ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया।
उस समय तो माता पार्वती उनकी नाराज़गी समझ नहीं पायी पर जब माता दो थालियों में भोजन परोसकर लायी तो भगवान ने दो थालिया देखकर आश्चर्य चकित होकर पूछने लगे कि ये दूसरी थाली किसके लिए है तो माता ने जवाब देते हुए कहा की ये मेरे पुत्र गणेश के लिए है क्या आपने उसे अंदर आते हुए नहीं देखा ?
माता की बात सुनकर भगवान् ने सारा वृतांत सुनाया। शिव जी से अपने पुत्रका वध सुनकर माता पार्वती क्रोध से विलाप करने लगी जिससे चारो लोको में हाहाकार मच गया। उस समय सभी देवी देवताओ ने भगवान् शिव से स्तुति करते हुए विनती की कि बालक को पुनर्जीवित कर दे।
जिसके पश्चात भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर उस मृत बालक के धड़ से जोड़ते हुए उसे जीवित कर दिया तभी से श्री गणेश जी का नाम गजमुख पड़ गया।
ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार एक बार नारद जी ने श्री नारायण से पूछा की प्रभु आप बहुत बुद्धिमान हैं और सभी वेदो को जानने हैं। मै आपसे यह जानना चाहता हूँ की जो शिव सारे परेशानियों के हरता हैं उन्होंने अपने पुत्र का मस्तक क्यों काट दिया था। पार्वती के अंश से उत्पन्न हुए पुत्र का सिर्फ एक गृह की दशा के कारण मस्तक कट जाना बहुत आश्चर्य की बात है।
श्री नारायण ने कहा नारद एक समय की बात है भगवान् शंकर ने माली और सुमाली को मारने वाले सूर्य पर त्रिशूल से प्रहार किया जिसके तेज़ के कारण सूर्य की चेतना नष्ट हुई। जब कश्यप जी ने देखा की मेरा पुत्र मरने की अवस्था में है तो वह फूट फूट कर रोने लगे। देवताओं में हाहाकार मच गया। सारे जगत में अँधेरा छा गया। तब ब्रह्मा के पुत्र महर्षि कश्यप ने शिव जी को शाप दिया "जैसा आज तुम्हारे प्रहार के कारण मेरे पुत्र का हाल हो रहा है उसी प्रकार तुम्हारे पुत्र पर भी होगा। उसका भी मस्तक कट जाएगा।कहा जाता है इसी श्राप के कारण गणेश जी का मस्तक कट गया था।
देवताओ ने गणेश ,गणपति ,विनायक,विघ्नहरता ,प्रथम पूज्य आदि कई नामो से उनकी स्तुति की।
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