भगवान शिव ने परमपिता ब्रह्मा को दिया श्राप ।
भगवान शिव ने परमपिता ब्रह्मा को क्यों दिया श्राप ?
ब्रह्मा जी का सर कैसे कटा और किसने काटा ?
एक बार की बात है परमपिता ब्रह्मा और भगवान विष्णु एक जगह एकत्रित हुए और दोनों में विवाद छिड़ गया कि दोनों देवताओं में कौन श्रेष्ठ है।
परमपिता ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता होने के कारण दावा कर रहे थे कि वो श्रेष्ठ है और भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता होने के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ बता रहे थे पर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा था उसी समय वहाँ पर एक प्रकाश स्तम्भ प्रकट हुआ जिसे संस्कृत ने लिंग भी कहते हैं। दोनों देवताओं ने आपसी सहमति से यह निष्कर्ष निकाला की जो भी इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा वो श्रेष्ठ कहलाया जायेगा।
दोनों देवता विपरीत दिशा में छोर खोजने के लिए निकल पड़े कुछ देर विचारण करने के बाद दोनों वापस आये और विष्णु जी बोले कि उन्हें इस लिंग का छोर नहीं मिल पाया है पर ब्रह्मा जी ने छूठ बोलते हुए कहा की उन्हें छोर मिल गया है और उन्होंने केतकी के फूल को साक्षी बताया।
तभी वहाँ पर भगवान शंकर जी प्रकट हुए और उन्होंने गुस्से में आकर ब्रह्मा जी का एक सर काट दिया और केतकी को श्राप दिया की उन्हें अब कभी भी पूजा में प्रयोग नहीं किया जायेगा और ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाएगी।
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